CISF:केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) ने पहली बार पूरी महिला कमांडो यूनिट गठित की है, जो खासकर हवाई अड्डों, मेट्रो और अन्य संवेदनशील प्रतिष्ठानों की सुरक्षा संभालेगी। यह कदम महिलाओं को सुरक्षा क्षेत्र में सशक्त भूमिका देने और बल में लैंगिक समानता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण है।
भारत की केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) ने एक नया इतिहास रचते हुए पहली बार पूरी महिला कमांडो यूनिट बनाई है। यह एक बड़ी पहल है जो महिलाओं को सुरक्षा क्षेत्र में मजबूत और अहम भूमिका दिलाने की दिशा में उठाया गया है। इस यूनिट का निर्माण खासकर उन प्रतिष्ठित और संवेदनशील जगहों की सुरक्षा के लिए किया जा रहा है, जहां आतंकवाद या अन्य धमकियों का खतरा सबसे अधिक होता है।
इस महिला कमांडो यूनिट का प्रशिक्षण मध्य प्रदेश के बारवाहा में स्थित सीआईएसएफ के क्षेत्रीय प्रशिक्षण केंद्र में जोर-शोर से चल रहा है। तीस महिलाओं की पहली बैच को आठ सप्ताह के विशेष कमांडो प्रशिक्षण में रखा गया है, जिसमें उन्हें शारीरिक फिटनेस, हथियार चलाने की कला, बाधा दौड़, रैपलिंग, और जंगल में बचाव आदि की ट्रेनिंग दी जा रही है। इस ट्रेनिंग का मकसद उन्हें तेज़ निर्णय लेने वाली क्विक रिएक्शन टीम्स (QRT) और स्पेशल टास्क फोर्स (STF) के काम के लिए पूरी तरह तैयार करना है। इसके अलावा, तनावपूर्ण हालात में लाइव फायरिंग का अभ्यास भी कराया जाता है ताकि वे आत्मविश्वास के साथ किसी भी मुश्किल स्थिति का सामना कर सकें।
सीआईएसएफ ने महिलाओं की संख्या बढ़ाने के लिए भी बड़ा कदम उठाया है। वर्तमान में सीआईएसएफ में महिलाएं कुल कर्मियों की केवल 8% हैं, पर सरकार का लक्ष्य इसे 10% तक बढ़ाना है। अगले साल 2026 में 2,400 और महिला कर्मियों की भर्ती की योजना है ताकि महिलाओं की हिस्सेदारी मजबूत हो सके। इस महिला कमांडो इकाई के बनने से यह संदेश जाता है कि सुरक्षा क्षेत्र में भी लैंगिक समानता और महिलाओं की भूमिका को महत्व दिया जा रहा है।
महिला कमांडो का असर सिर्फ लड़ाई-झगड़े तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वे देश के सुरक्षा नेटवर्क को और सशक्त बनाएंगी। ये कमांडो खासतौर पर हवाई अड्डों, मेट्रो जैसे संवेदनशील स्थानों, और अन्य महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों पर तैनात होंगी, जहां उन्हें आतंकवाद के खतरों से निपटना होगा। अब सुरक्षा के ऐसे काम जहां पुरुषों का नाम लिखा था, वहां महिलाओं की भी ताकत शामिल हो गई है। इससे महिलाओं को भी अपने देश की सेवा करने में समान अवसर मिल रहे हैं।
सीआईएसएफ की इस पहल से सुरक्षा क्षेत्र में महिलाओं का मनोबल बढ़ेगा और समाज में भी महिलाओं के लिए नई उम्मीदें जगेगी। यह साबित करता है कि महिलाएं किसी भी चुनौती को स्वीकार करने और उस पर जीत हासिल करने में सक्षम हैं। आने वाले समय में ऐसी और भी महिला कमांडो यूनिट्स बनेंगी और वे भारत की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूती देंगी।
संक्षेप में कहा जाए, तो सीआईएसएफ की पहली महिला कमांडो यूनिट न सिर्फ एक ट्रेनिंग प्रोग्राम है, बल्कि यह भारत की महिलाओं के सामर्थ्य और साहस की चमक है। यह पहल देश की सुरक्षा को नई दिशा देती है और महिला सशक्तिकरण का एक प्रतीक बनकर उभरी है। आने वाले दिनों में ऐसे कदम देश को मजबूती देंगे और महिलाओं को हर क्षेत्र में समान अवसर प्रदान करने में मदद करेंगे।