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Diwali 2025: दिवाली 2025 कब है? पांच दिन का पूरा कैलेंडर देखें शुभ मुहूर्त के साथ

Diwali 2025:भारत में हर साल दशहरा और दिवाली का पर्व विशेष उत्साह के साथ मनाया जाता है। वर्ष 2025 में दशहरा, धनतेरस, दिवाली, गोवर्धन पूजा और भाई दूज खास संयोग और शुभ मुहूर्तों के साथ आ रहे हैं। जानिए इन त्योहारों की तिथि, पूजा का समय, महत्व और पौराणिक कथाएँ विस्तार से।
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diwali kab hai 2025

Diwali 2025:भारत त्योहारों की धरती है। यहाँ हर महीने कोई न कोई पर्व लोगों के जीवन में नई ऊर्जा और उत्साह लेकर आता है। लेकिन अक्टूबर का महीना तो बिल्कुल खास होता है क्योंकि इसी महीने देश में Dussehra 2025 (दशहरा 2025), Dhanteras 2025 (धनतेरस 2025), Diwali 2025 (दीवाली 2025), Govardhan Puja 2025 (गोवर्धन पूजा 2025) और Bhai Dooj 2025 (भाई दूज 2025) जैसे बड़े त्योहार मनाए जाते हैं। ये पर्व सिर्फ पूजा और परंपरा तक सीमित नहीं बल्कि समाज को जोड़ने, रिश्तों को मजबूत करने और अच्छाई की जीत का संदेश देने का माध्यम भी हैं।

दशहरा 2025 कब है?
हिंदू पंचांग के अनुसार, अश्विन मास की शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को दशहरा या विजयदशमी मनाया जाता है। इस वर्ष यह पर्व: गुरुवार, 2 अक्टूबर 2025 को मनाया जाएगा। यह तिथि 1 अक्टूबर की रात से शुरू होकर 2 अक्टूबर की शाम तक रहेगी। दशहरा जिसे विजयादशमी कहा जाता है, बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक पर्व है। इस दिन भगवान श्रीराम ने रावण का वध कर लंका पर विजय प्राप्त की थी। पूरे देश में रावण-दहन, रामलीला और शोभायात्राओं का आयोजन होता है।

क्यों खास है इस बार का दशहरा?
इस वर्ष दशहरा गुरुवार को पड़ रहा है, जो धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अत्यंत शुभ है। हिमाचल प्रदेश का प्रसिद्ध कुल्लू दशहरा 2025 अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आकर्षण का केंद्र रहेगा। देश के कई हिस्सों में दशहरे पर विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रम और मेले भी लगेंगे।


धनतेरस 2025 कब है?

दीपावली उत्सव की शुरुआत धनतेरस से होती है। यह दिन “धन” (समृद्धि) और “तेरस” (तेरहवीं तिथि) का प्रतीक है। इस वर्ष धनतेरस की तिथि होगी
तारीख: शनिवार, 18 अक्टूबर 2025
शुभ मुहूर्त: शाम 6:59 बजे से रात 8:36 बजे तक

धनतेरस दिवाली महापर्व की शुरुआत का दिन है। इस दिन भगवान धन्वंतरि का जन्म हुआ था, इसलिए इसे आयुर्वेद और स्वास्थ्य दिवस भी कहा जाता है। लोग इस दिन चांदी, सोना, बर्तन, इलेक्ट्रॉनिक्स और वाहन खरीदते हैं। मान्यता है कि इस दिन खरीदी गई वस्तुएँ घर में सुख-समृद्धि लाती हैं।

धनतेरस की परंपरा : धन्वंतरि की पूजा से रोगमुक्ति और लंबी उम्र की कामना की जाती है। माँ लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा भी इस दिन की जाती है। बाजारों में रौनक रहती है और नए सामान की खरीदारी शुभ मानी जाती है।

दिवाली 2025 कब है?

धनतेरस और नरक चतुर्दशी के बाद दीवाली (लक्ष्मी पूजा) का मुख्य पर्व आता है।दीवाली रोशनी का पर्व है जो अंधकार से प्रकाश, अज्ञान से ज्ञान और नकारात्मकता से सकारात्मकता की ओर बढ़ने का संदेश देता है। यह पर्व पाँच दिनों तक मनाया जाता है

मुख्य दिवाली (लक्ष्मी पूजा): सोमवार, 20 अक्टूबर 2025 को।

अमावस्या तिथि: 20 अक्टूबर दोपहर 3:44 बजे से 21 अक्टूबर शाम 5:54 बजे तक।

लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त: 20 अक्टूबर शाम 7:08 PM से 8:18 PM।

दिवाली भारत का सबसे बड़ा और लोकप्रिय त्योहार है। मान्यता है कि इस दिन भगवान श्रीराम 14 वर्ष का वनवास पूरा कर अयोध्या लौटे थे और अयोध्यावासियों ने दीप जलाकर उनका स्वागत किया था। इस दिन घरों में दीप जलाना, मिठाइयाँ बांटना और पटाखे छोड़ना परंपरा है। दिवाली सोमवार को पड़ रही है, जो धन और सौभाग्य के लिए शुभ दिन माना जाता है। लोग माँ लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा कर सुख-समृद्धि की कामना करेंगे। पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए कई जगह Green Diwali 2025 का प्रचार होगा।

इस बार की दिवाली क्यों खास है?

इस वर्ष लक्ष्मी पूजा सोमवार को है, जो चंद्रमा का दिन माना जाता है। अमावस्या दो दिन तक रहने के कारण कुछ जगह दीवाली दो दिन भी मनाई जाएगी। पंचदिवसीय पर्व के हर दिन शुभ योग बन रहे हैं।

गोवर्धन पूजा 2025 कब है?
तारीख: मंगलवार, 22 अक्टूबर 2025
सुबह पूजा मुहूर्त: 06:39 AM – 08:57 AM
शाम पूजा मुहूर्त: 03:29 PM – 05:45 PM

गोवर्धन पूजा को अन्नकूट भी कहा जाता है। यह पर्व दिवाली के अगले दिन मनाया जाता है। कथा के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण ने इन्द्रदेव के कोप से गोकुलवासियों को बचाने के लिए गोवर्धन पर्वत उठाया था। प्रकृति और अन्न के प्रति आभार प्रकट करने का पर्व है। इस दिन घर-घर में अन्नकूट का भोग बनता है और मंदिरों में विशेष आयोजन होते हैं। किसान वर्ग इस दिन विशेष पूजा करता है और नए मौसम की शुरुआत करता है।

भाई दूज 2025 कब है?
तारीख: गुरुवार, 23 अक्टूबर 2025
द्वितीया तिथि प्रारंभ: 22 अक्टूबर रात 11:18 बजे
समाप्ति: 23 अक्टूबर सुबह 9:30 बजे
पूजा का समय: 11:30 AM – 1:05 PM (कुछ पंचांग 1:33 PM – 3:50 PM भी मानते हैं)

भाई दूज भाई-बहन के रिश्ते का पर्व है। भाई दूज को यम द्वितीया भी कहते हैं। इस दिन बहनें अपने भाइयों को तिलक लगाकर उनकी लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। बदले में भाई अपनी बहनों को उपहार और वचन देते हैं।

कथा: मान्यता है कि यमराज अपनी बहन यमुनाजी से मिलने आए थे और बहन ने उन्हें तिलक किया। तभी से यह परंपरा चली आ रही है।

दशहरा शुक्रवार को पड़ रहा है, जो अत्यंत शुभ माना जाता है। दिवाली सोमवार को है, जिसे लक्ष्मी प्राप्ति के लिए सर्वोत्तम माना गया है। धनतेरस, गोवर्धन पूजा और भाई दूज सभी शुभ मुहूर्त में पड़ रहे हैं। त्योहारों की यह श्रृंखला गांधी जयंती और नवरात्रि जैसे अवसरों के करीब है, जिससे अक्टूबर का महीना और भी विशेष बन गया है। भारत के त्योहार केवल धर्म तक सीमित नहीं बल्कि संस्कृति, परंपरा और सामाजिक सद्भाव के प्रतीक हैं। दशहरा 2025, धनतेरस 2025, दिवाली 2025, गोवर्धन पूजा 2025 और भाई दूज 2025 सभी अपने आप में विशेष महत्व रखते हैं। इस वर्ष इन त्योहारों के शुभ संयोग और समय इन्हें और भी खास बना रहे हैं। इन पर्वों के माध्यम से हमें यह संदेश मिलता है कि हमें हमेशा बुराई पर अच्छाई की विजय, अंधकार पर प्रकाश और स्वार्थ पर प्रेम को चुनना चाहिए।

धनतेरस  18 अक्टूबर

नरक चतुर्दशी (छोटी दीवाली)  19 अक्टूबर

दीवाली (लक्ष्मी पूजा)  20 अक्टूबर

गोवर्धन पूजा  22 अक्टूबर

भाई दूज  23 अक्टूबर
 

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